TDP मोदी सरकार से क्यों रिश्ता तोड़ने पर है अड़ा?

तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) पिछले चार साल से आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे की मांग कर रही है. यह मांग नए राज्य के निर्माण के साथ ही शुरू हो गई थी लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विशेष राज्य का दर्जा देने से इनकार कर दिया था. जेटली ने कहा था कि आंध्र को सिर्फ स्पेशल पैकेज दिया जाएगा.

साल 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ ही आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव भी होने हैं. ऐसे में मोदी सरकार के अधूरे वादों को लेकर टीडीपी ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है. जानें, आखिर टीडीपी की क्या-क्या मांगें हैं और जिसके पूरे नहीं होने से गठबंधन टूटने जा रहा है:

आंध्र प्रदेश को लेकर टीडीपी की ये है मांग

– सीएम चंद्रबाबू नायडू की मांग है कि केंद्र पोलावरम परियोजना के लिए 58,000 करोड़ रुपए को तत्काल मंजूरी दे.

– अमरावती के विकास के लिए केंद्रीय बजट में पर्याप्त राशि सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है.

– चंद्रबाबू नायडू की मांग है कि पीएम मोदी और उनकी सरकार राज्य विधानसभा की सीटें 175 से बढ़ाकर 225 करने के लिए तत्काल कदम उठाएं.

– टीडीपी प्रमुख नायडु का कहना है कि राज्य के बंटवारे के कारण आंध्र को वित्त संकट का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में बंटवारे के बाद कानून के तहत की गई प्रतिबद्धताओं को लागू करने में देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इससे दिक्कतें और बढ़ेंगी.

आंध्र प्रदेश विधानसभा का समीकरण

साल 2014 में हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव बीजेपी और टीडीपी ने अच्छा प्रदर्शन किया था. टीडीपी-एनडीए गठबंधन को 175 सीटों में 106 सीटों पर जीत मिली थी. इनमें से 102 सीटें टीडीपी को मिली, जबकि 4 सीटों पर कमल खिला था. वहीं, कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ने वाली जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस को सिर्फ 67 सीटें हासिल हुई थी. बता दें कि मौजूदा वक्त में एनडीए सहयोगी टीडीपी के पास 15 सांसद हैं. मोदी कैबिनेट में टीडीपी के दो मंत्री हैं.

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