सादकी बार्डर पर अपनों से इशारों में बात करने का कारण

फाजिल्का.14 और 15 अगस्त को पाकिस्तान और भारत स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, लेकिन आजादी के 71 वर्ष बाद भी दोनों देशों के बिछड़े को सरहदों में बांट दिया है। अपने इसी दर्द को कम करने के लिए साल में 2 दिन 14 और 15 अगस्त को फाजिल्का के सादकी बार्डर पर गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली इत्यादि राज्यों से लोग अपने रिश्तेदारों को देखने आते हैं। कारगिल युद्ध के बाद से मिलना हुआ बंद।

इंडो-पाक इंटरनेशनल गेट

  • सादकी बॉर्डर पर होने वाली रिट्रीट सेरेमनी से पर पहुंचने से पहले सीमा सुरक्षा बल के जवानों की ओर से प्रत्येक पर्यटक की तलाशी ली जाती है।
  • उस स्थान पर बड़े कद वाला इंडो-पाक इंटरनेशनल गेट का निर्माण किया गया, ताकि गेट पर्यटकों के दिल को छू जाए।
  • इस गेट के निर्माण पर लगभग 37 लाख रुपए की लागत आई है।
डेढ़ दशक पूर्व भारत और पाकिस्तान की हकूमतों की आपसी रजामंदी के चलते दोनों देशों की सरकारों ने सादकी बार्डर पर विभाजन के दौरान बिछड़े परिवारों को एक दूसरे से मिलने की इजाजत दी थी। लेकिन कारगिल युद्ध के बाद दोनों देशों में आई खट्टास के बाद अब यह मेलजोल बंद हो गया। एक दूसरे का दूर से दीदार करने का सिलसिला अभी भी जारी है, जोकि 14 और 15 अगस्त को फाजिल्का के सादकी बार्डर पर दूर से हाथ हिलाकर या इशारों-इशारों में अपने मन की बातें करते हैं।
बता दें कि 14 और 15 अगस्त को भारत और पाकिस्तान दोनों ओर से हजारों की संख्या में पर्यटक और अन्य लोग सादकी बार्डर पर इकट्ठे होते हैं। जहां 14 अगस्त को सरहद के उस पार पाकिस्तान के लोग अपने क्षेत्र में स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम कर अपने जवानों की हौंसला अफजाई करते हैं वहीं दूसरी ओर 15 अगस्त को भारतीय क्षेत्र में हिंदुस्तानी लोग भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाकर अपने जवानों का हौसला बढ़ाते हैं।
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