शहीद हुए राजकुमार यादव की पत्नी को इंतज़ार अशोक चक्र का

भिवानी : 26 एडी रेजीमेंट में तैनात राजकुमार यादव आठ जुलाई 1998 को बारामूला की रसीकोल चौकी पर रात को ड्यूटी दे रहे थे। उसी समय चौकी पर उग्रवादियों ने हमला कर दिया। उस समय चौकी में नियुक्त बाकी जवान आराम कर रहे थे तो राजकुमार यादव बाहर चौकी पर तैनात थे। रात करीब एक बजे हुए उग्रवादियों के हमले में राजकुमार यादव ने चार उग्रवादियों को मार गिराया। गोलियां सुनकर दूसरे साथी खड़े हुए तो शहीद हो चुके थे राजकुमार।

 बाद में 20 हजार की सहायता मिली

बाद में सैनिक की विधवा कोटे से एक पेट्रोल पंप के लिए अप्लाई किया तो वह मिला। वहीं उस समय हरियाणा सरकार ने शहीद राजकुमार के परिजनों को मात्र 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। इसके अलावा राजकुमार के परिजनों को केंद्र सरकार ने किसी तरह की नौकरी मिली। इस बात का मलाल शहीद की पत्नी सुनील देवी और उसकी मां इंद्रावती देवी को आज भी है। उन्हें इंतजार है सरकार और भले ही कुछ ना दे, लेकिन मरणोपरांत अशोक चक्र तो देना चाहिए था ताकि वे उस मेडल को लोगों को दिखा सकें कि देश की सेना में भर्ती होकर शहीद होने पर कितना गर्व होता है।

  • वहीं गोलियों की आवाज सुनकर चौकी में सो रहे बाकी फौजी उठ गए और उन्होंने भी उग्रवादियों पर जवाबी कार्रवाई की लेकिन तब तक राजकुमार यादव शहीद हो चुके थे।
  • जब यूनिट की ओर से उनके शव को गांव लाया गया तो परिजनों को बताया कि राजकुमार यादव को मरणोपरांत अशोक चक्र दिया जाएगा। मगर राजकुमार की शहादत के 19 साल बाद भी यह सम्मान सरकार की ओर से उनके परिजनों को नहीं दिया गया।
  • और तो और शहादत से करीब छह महीने पहले ही राजकुमार की दुल्हन बनकर आई सुनील देवी को सरकार ने किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं दी।

 अपने खर्च पर बनाया स्मारक

शहीद राजकुमार यादव के भाई अनिल यादव ने बताया कि उन्होंने अपने भाई की याद में गांव में अपने ही प्लाट में अपने खर्चे पर शहीद स्मारक बनवाया हुआ है। इस स्मारक पर हर साल वे अपने खर्चे पर अपने भाई का शहीदी दिवस मनाते हैं। इसके लिए उन्हें सरकार की ओर से आज तक कोई सहायता नहीं मिली है।

 

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