7 साल बाद लगी अयोध्या भूमि विवाद पर तारीख 

नई दिल्‍ली : यूपी के शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने श्रीराम जन्मभूमि विवाद को नई दिशा दे दी है। शिया वक्फ बोर्ड ने कहा है कि ढहाई गई बाबरी मस्जिद उसकी प्रॉपर्टी थी और अब वो मस्जिद को विवादित स्थल से दूर कहीं मुस्लिम बहुल इलाके में बनाना चाहता है। इस ममाले में 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करने जा रहा है, और शिया वक्फ बोर्ड ने खुद ये बात सुप्रीम कोर्ट को दिए हलफनामे में कही है.

हलफनामे में यह भी कहा गया है कि शिया वफ्फ बोर्ड विवादित जगह पर भी दावा छोड़ सकता है, यदि सरकार उन्हें दूसरी जगह पर ऐसी ही मस्जिद बनाने की जगह दे .

शिया बनाम सुन्‍नी
शिया वक़्फ़ बोर्ड ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड शांति पूर्ण तरीके से समाधान नहीं चाहता. इस मसले को सभी पक्ष आपस में बैठकर सुलझा सकते हैं और सुप्रीम कोर्ट इसमें उन्हें वक्त दे. इसके लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई जाए जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुआई में हाई कोर्ट के दो सेवानिवृत जज, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी के अलावा और पक्षकार शामिल हों.

यह था हाई कोर्ट का फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2010 में जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षकारों में बांटने का आदेश दिया था. हाई कोर्ट ने जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था. हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में अपीलें दाखिल कर रखी हैं जो कि पिछले छह साल से लंबित हैं. इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी.

किन 4 शर्तों पर अटक रही बात?
अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद आजतक ने बातचीत की पहल की. आज तक ने दोनों पक्षकारों से इस मामले पर बात की और मुद्दे के समाधान को लेकर उनकी राय को सामने लाने की कोशिश की. हिंदू और मुसलमान दोनों ही पक्षों ने कहा कि इस मामले पर केंद्र सरकार दोनों पक्षों से अलग-अलग बात करे. पक्षकारों ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कई बाते रखीं जिनमें चार शर्तें सामने आईं-
शर्त 1- उसी 2.7 एकड़ जमीन पर बने राम मंदिर-मस्जिद.
शर्त 2- शर्त- पहल आगे बढ़ाने के लिए केंद्र नुमाइंदे भेजे.
शर्त 3- सुब्रमण्यम स्वामी और हाजी महबूब जैसे विवाद बढ़ाने वाले लोग दूर रहें.
शर्त 4- अयोध्या में दोनों पक्षकार एक साथ बैठें.
तीन जजों की बैंच  करेगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या रामजन्म भूमि विवाद मामले की सुनवाई तीन जजों की विशेष्ज्ञ पीठ करेगी। इस मामले मे न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर की पीठ अपीलों पर 11 अगस्त से मामले की सुनवाई करेगी। इस विशेष पीठ के गठन के बाद सात वर्षो से लंबित इस मामले में नियमित सुनवाई और जल्दी निपटारे की उम्मीद जगी है।
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