50 से 60 किलाेमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली तेज हवा के कारण आग ने धारण किया विकराल रूप

हरियाणा: प्रदेशभर में शुक्रवार काे 50 से 60 किलाेमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली तेज हवा के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। प्रदेश में एक दिन में शुक्रवार को करीब 700 एकड़ गेहूं जलकर राख हो गया। जबकि पूरे प्रदेश में अब तक इस सीजन में करीब 2 हजार एकड़ गेहूं जल चुका है। यदि कम से कम प्रति एकड़ 20 क्विंटल की औसत से देखा जाए तो 34,600 रुपए बनते हैं।

अब तक प्रदेशभर के किसानों का करीब 7 करोड़ रुपए का गेहूं आग की भेंट चढ़ चुका है। अब इन किसानों की आखिरी उम्मीद सिर्फ सरकार की ओर से मिलने वाली मुआवजा राशि (प्रति एकड़ 12 हजार रुपए) है। वह कब तक मिलेगी इसका कोई अनुमान नहीं, क्योंकि पिछले साल हुई गेहूं की फसल में आगजनी की घटनाओं का मुआवजा सरकार ने शुक्रवार को जारी किया है।

जींद में अब तक 300 एकड़, करनाल में 350 एकड़, फतेहाबाद में 70 एकड़, भिवानी में 23, दादरी में 56, रोहतक में 400 एकड़, सोनीपत में 314 एकड़, पानीपत में 332 एकड़, अम्बाला में 150 एकड़ गेहूं जल चुका है। यह वे जिले हैं, जहां बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। एक दिन में शुक्रवार को अकेले कुरुक्षेत्र में 24, कैथल में 68, यमुनानगर में 25, हिसार में 37 एकड़ गेहूं जल गया।

गेहूं काटने के बाद जो फानें जले वह नुकसान अलग है। यह नुकसान किसानों को हर साल झेलना पड़ता है। जबकि सरकार गेहूं सीजन से पहले तमाम तरह के आग पर काबू पाने के वादे करती है, लेकिन आग लगने में देर लगती और जब तक अग्निशमन गाड़ियों पहुंचती है, आग कई एकड़ में फैल चुकी होती है। ऐसे में अग्निशमन गाड़ियां भी आग पर काबू पाने में नाकाम रहती है।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने फसलों में नुकसान से बचने के लिए किसानों के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की है, लेकिन उसकी शर्तें ऐसी हैं कि किसान लाभ नहीं उठा पा रहे हैं, यह भी कह सकते हैं कि किसान केवल प्रीमियम ही भर रहे हैं। इस बीमा योजना में गेहूं में हुई आगजनी की घटना को कवर नहीं किया गया है। जबकि किसानों की हजारों एकड़ गेहूं की फसल हर साल जलकर राख हो जाती है। इसके बाद मुआवजा देने के नाम सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटकर किसान घर बैठ जाते हैं।

नुकसान 40 हजार का, मुआवजे में मिलते हैं सिर्फ ‌12 हजार

प्रदेश में फसल सुरक्षा के लिए शुरु की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत आगजनी काे कवर नहीं किया जाता है, लेकिन सरकार की ओर से 12 हजार रुपए प्रति एकड़ का मुआवजा देने की घोषणा 2017 में की गई थी। किसानों का कहना है कि उन्हें प्रति एकड़ 40 हजार रुपए का नुकसान होता है। जबकि सरकारी की तरफ से उन्हें सिर्फ 12 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाता है। यह मुआवजा लेने के लिए भी बिजली विभाग के खिलाफ केस किया जाता है, किसान केस जीत जाए तो ही मुआवजा मिल पाता है।

किसानों में भारी रोष

किसानों ने सरकारी नुमाइंदों व राजनीतिक दलों से सवाल किया कि फसल बीमा के नाम हर साल प्रीमियम कटता है तो गेहूं में आगजनी होने पर इसमें कवर क्यों नहीं किया जाता?

प्रदेश सरकार ने पिछली साल के मुआवजे के 49 लाख किए जारी

िवत्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने शुक्रवार को प्रदेश में गेहूं क्राॅप में लगी अाग के विशेष गिरदावरी के अादेश दिए हैं। गिरदावरी के बाद सरकार की नीति के तहत किसानाें काे मुअावजा दिया जाएगा। सरकार की अाेर से 2017-18 में गेहूं की क्राॅप में अाग लगने पर 4953775 लाख रुपए किसानाें के लिए स्वीकृत किए गए।

इनमें अम्बाला में दाे लाख, भिवानी में 4 लाख, फरीदाबाद में दाे लाख, फतेहाबाद में दाे लाख, गुरुग्राम में दाे लाख, हिसार में दाे लाख , झज्जर में दाे लाख, जींद में दाे, करनाल में दाे लाख , कुरुक्षेत्र में दाे लाख, महेंद्रगढ़ में दाे लाख, नूंह में दाे लाख, पंचकूला में 383050 लाख, पानीपत में दाे लाख, पलवल में दाे लाख, रेवाड़ी में 218750, राेहतक में 260000, सिरसा में 381200, साेनीपत में 250775, यमुनानगर में 260000 रुपए स्वीकृत किए गए।

इन 5 जिलों में आगजनी की ज्यादा घटनाएं

रोहतक 400 एकड़
करनाल 350 एकड़
पानीपत 332 एकड़
सोनीपत 314 एकड़
जींद 300 एकड़
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