25 मीटिंग-50 चाय से मतलब नहीं, काम क्या किया? SC की फटकार !

नई दिल्ली: दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के उपराज्यपाल को फटकार लगाई. राज्यपाल पर बरसते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप कह रहे हैं कि हर मामले के हम प्रभारी हैं, सुपरमैन हैं. लेकिन लगता है कि आप कुछ करेंगे नहीं. आपको लगता है कि आपको कोई छू नहीं सकता. आप संवैधानिक पद पर हैं. जब कोई काम आता है तो आप बस पास कर देते हैं कि ये उसकी जिम्मेदारी है.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि हमें एक्शन की टाइमलाइन बताएं, 25 बैठक हुई हैं या 50 कप चाय पी है इससे हमें मतलब नहीं. आप एलजी हैं, आपने बैठक की है इसलिए हमें टाइमलाइन और स्टेटस रिपोर्ट दें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर मामले में मुख्यमंत्री को मत घसीटिए, आपको सिंपल अग्रेंजी में ये बताना है कि कूड़े के पहाड़ कब हटेंगे.

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि बैठक में तय हुआ था कि रोजाना दो बार सफाई होगी, जो भी अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार हैं उनके नाम वेबसाइट पर होना चाहिए. इसके लिए सजा का प्रावधान भी होना चाहिए. याचिकाकर्ता ने कहा कि सफाई से संबंधित बैठक में ना तो उपराज्यपाल खुद आए और ना ही अपना कोई नुमाइंदा भेजा. इस पर कोर्ट ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि और ये कहते हैं कि I AM THE SUPERMAN.

कोर्ट ने पूछा कि हलफनामे में LG ने अधिकार और ज़िम्मेदारी की बात की है. कचरे और साफ-सफाई के मामले में उनकी जिम्मेदारी है या नहीं? हां या ना?. इस पर एलजी की ओर से ASG पिंकी आनन्द ने कहा- हां! LG को डायरेक्शन जारी करने का अधिकार 487 के तहत है.  इसके बाद कोर्ट ने पूछा कितने निर्देश जारी किए?

आपको बता दें कि अभी दो दिन पहले ही जस्टिस मदन भीमराव लोकुर की अगुवाई वाली पीठ ने नाराज़गी भरे लहजे में कहा था कि हर जगह बदइंतजामी है. मुंबई में पानी की बाढ़ है, तो दिल्ली में कूड़े की. तभी यहां दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन में लापरवाही की वजह से डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया वगैरह फैलते हैं. दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार से पूछा कि आखिर राजधानी में कूड़ा प्रबंधन की जिम्मेदारी किसकी है, मुख्यमंत्री की या LG की या फिर केंद्र सरकार की?

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