22 जिलों में शुरू होगी गोबर धन योजना, तकनीकी एक्सपर्ट करेंगे मदद

अब ठोस कचरे एवं जानवरों के मलमूत्र से खाद व बायोगैस ईंधन बनाया जाएगा। सरकार ने ‘गोबर धन योजना’ बनाई है। इसकी शुरूआत सीएम सिटी करनाल से राष्ट्रीय स्तर पर होगी। योजना का मुख्य उद्देश्य गांव की स्वच्छता व गोबर से बायोगैस ऊर्जा का उत्पादन करना है। हर जिले में एक गांव का चयन किया जाएगा, ताकि इसे और बढ़ावा मिल सके। करनाल में इसकी शुरुआत कुंजपुरा गांव से होगी।

– विश्व में सर्वाधिक 300 मिलियन पशुओं की संख्या भारत में है, जिनसे प्रतिदिन 3 मिलियन मलमूत्र अथवा गोबर मिलता है। हरियाणा में भी करीब 90 लाख पशु हैं, जबकि कुछ यूरोपियन देश और चीन ने पशुओं से प्राप्त गोबर का सदुपयोग करके बायोगैस जैसी ऊर्जा का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया है।

– पीएम ने देश में गेल्वैनिक ऑर्गेनिक बायो एग्रो रिसोर्सिज़ (गोबर धन) बनाने पर जोर दिया था।

कंपोस्ट खाद भी बन सकेगी

योजना किसानों की आय बढ़ाने में काफी हद तक मददगार होगी। गोबर से बेहतर कंपोस्ट खाद भी बन पाएगी। प्राप्त बायो ऊर्जा से जहां एक ओर बिजली बचाई जा सकेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रो में रहने वाले लोगों को धुएं वाले ईंधन से छुटकारा मिलेगा।

तकनीकी एक्सपर्ट करेंगे मदद

  • योजना में ग्राम पंचायत की भूमिका अहम है। गोबर से बायोगैस प्लांट व्यक्तिगत, सामुदायिक, सेल्फ हेल्प ग्रुप, या गऊशाला जैसे एनजीओ के स्तर पर स्थापित किए जा सकते हैं।
  • प्लांट के लिए टेक्निकल कल एक्सपर्ट की सहायता ली जाएगी। इसके लिए भारत सरकार और राज्य सरकार 60:40 के अनुपात से धनराशि उपलब्ध करवाएगी, जो गांव में हाउस होल्ड की संख्या पर आधारित होगी।
  • देशभर में इस साल योजना के तहत 700 जिले कवर किए जाएंगे। शुक्रवार को मंत्रालय से आई कंसल्टेंट कुमारी सिरेशा ने गोबर धन योजना पर प्रेजेन्टेशन दी, जिसमें विभिन्न मॉडल दिखाए गए।
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