15 हज़ार महिलाओं की हड़ताल बनी दुनिया के लिए प्रेरणा !

कुछ ऐसे भी लम्हें होते हैं जब महिलाओं की हिम्मत व जज्बे को सलाम किया जाता है। हर साल 8 मार्च को इंटरनेशनल वुमन्स डे मनाया जाता है। दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्घियों के  के तौर पर वुमन्स डे मनाया जाता है।

वुमन्स डे का इतिहास

इसकी शुरुआत 8 मार्च 1857 को न्यूयॉर्क में हुई। जब महिलाओं ने टेक्सटाइल फैक्टरीज के खिलाफ आंदोलन किया था। उन्होंने कम तनख्वाह और काम की शर्तो में सुधार के लिए आग्रह किया था। वह आंदोलन पुलिस के अत्याचारों के चलते दबा दिया गया लेकिन दो साल बाद इसी दिन फिर से महिलाओं ने अपना लेबर यूनियन बनाया। ऐसे ही आंदोलनों को अब बाकायदा आकार मिल चुका था और 1908 में न्यूयॉर्क में 15000 महिलाओं ने प्रदर्शन कर काम के घंटे कम करने, अच्छी तनख्वाह और वोटिंग के अधिकार पाने की मांगें रखीं।

1909 में हुई वुमन्स डे की शुरुआत

यह दिवस सबसे पहले 26 जनवरी 1909 में अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर मनाया गया था। इसके बाद यह फरवरी के आखरी इतवार के दिन मनाया जाने लगा। 1910 में सोशलिस्ट इंटरनेशनल के कोपेनहेगन के सम्मेलन में इसे अंतर्राष्ट्रीय दर्जा दिया गया। उस समय इसकी प्रमुख मांग महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाना था क्योंकि, उस समय अधिकतर देशों में महिलाओं को वोट देने का अधिकार नहीं था। रूस की महिलाओं ने 1917 में, महिला दिवस पर रोटी और कपड़े के लिए हड़ताल करने का फैसला किया। यह हड़ताल भी ऐतिहासिक थी। इसके बाद महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला। इसीलिए 8 मार्च को महिला दिवस मनाया जाने लगा।

1960 का दशक

लेकिन पश्चिम में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 1910 से 20 तक मनाया गया लेकिन इसके बाद ज्यादा जोश नहीं रहा। 1960 के दशक में एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की जरूरत महसूस की गई ताकि महिलाओं को सशक्त किया जा सके। 1917 की रूसी क्रांति की ओर कदम बढ़ाने वाला प्रदर्शन महिलाओं के नाम ही लिखा गया है। आगे चलकर उन्होंने भी क्रांति के स्वरूप को निखारने के लिए प्रयास किए। तब से लेकर अब तक ये दिन महिलाओं को समर्पित कर दिया गया।

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