रोजगार के अवसर पैदा करने के मामले में टॉप-10 से बाहर हुआ हरियाणा

पानीपत : रोजगार के अवसर पैदा करने के मामले में हरियाणा लगातार पिछड़ता जा रहा है। इस बार हरियाणा टॉप टेन से ही बाहर हो गया। यह सामने आया है स्किल इंडिया-2018 के 5वें संस्करण की रिपोर्ट में। हाल ही में जारी रिपोर्ट के लिए देश की 120 कंपनियों और 5 लाख नौकरी पा चुके युवाओं की फीडबैक ली गई। रोजगार पाने के लिए कौशल क्षमता देशभर में 45.60% पर पहुंच गई, जो गत साल के मुकाबले 5.16% ज्यादा है। हरियाणा इसमें भी पिछड़कर छठे स्थान पर रहा।

वर्क लोकेशन के नजरिए से हरियाणा को इसमें सबसे निचले पायदान पर रखा गया है। इच्छुक एरिया में काम करने के लिए टॉप 10 से भी हरियाणा बाहर है, केवल हरियाणा की राजधानी चंडीगढ़ 10वें नंबर पर है। ऐसा नहीं है कि हरियाणा में स्किल के लिए काम नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार स्किल को लेकर बनाई गईं केंद्र की योजनाओं को सबसे पहले हरियाणा ने लागू किया। इसकी पड़ताल में सामने आया कि हरियाणा कागजों में योजना लागू करने में सबसे आगे रहा है, लेकिन इसे धरातल पर लागू करने में पिछड़ जाता है।

15% नौकरी बढ़ने का है अनुमान

स्किल रिपोर्ट 2018 के अनुसार इस साल नई नौकरियों में 10 से 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान है। हरियाणा में इंप्लायमेंट स्किल हायरिंग 6.74 प्रतिशत रहा है। यानी हम देश में नंबर छह पर रहे हैं। भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर रोजगार सृजन में हरियाणा देश में चौथे पायदान पर रहा है। रोजगार क्षमता में इस बार टॉप 10 की लिस्ट से हरियाणा जहां बाहर हो गया है, वहीं पहली बार इसमें शामिल हुआ पंजाब 8 वें नंबर पर जगह बनाने में सफल रहा है।

इसलिए महिलाएं यहांं काम करना नहीं चाहती

  • महिलाओं में रोजगार पाने की क्षमता के मामले में बेंगलुरू देश में पहले स्थान पर है। हरियाणा यहां भी टॉप 10 से बाहर है।
  • इतना ही नहीं जब काम करने वाली महिलाओं से बात कर जाना गया कि वो कहां काम करना पसंद करती हैं तो उसमें भी महिलाओं ने हरियाणा को नापसंद बताया।
  • महिला वर्करों के अनुसार हरियाणा की कंपनियों में उन्हें सुरक्षित माहौल नहीं मिल पाता है। इतना ही नहीं हरियाणा में काम करते समय तनाव ज्यादा रहता है।

15 से 59 साल वर्किंग एज

इस लिहाज से भारत के पास दुनिया में सबसे ज्यादा वर्कफोर्स होने का अनुमान लगाया गया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े युवा लोग तेजी से नॉन फॉर्म सेक्टर की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से निर्माण, व्यापार और ट्रांसपोर्ट कारोबार शामिल है। इन सेक्टर में आय कृषि सेक्टर से 70 प्रतिशत अधिक है।

52% इंजीनियर नौकरी योग्य

रिपोर्ट के मुताबिक देशभर के कॉलेजों से पासआउट हो रहे 52 फीसदी इंजीनियर्स नौकरी पाने के योग्य हैं। इंजीनियरिंग की सभी ब्रांच में आईटी और कंप्यूटर साइंस अब भी सबसे आगे है। आईटी में इंप्लॉयबिलिटी 64.7 जबकि कंप्यूटर साइंस में 56.05 प्रतिशत है। मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (एमसीए) में इंप्लॉयबिलिटी 13 फीसदी बढ़ी है। बीफॉर्मा में इंप्लॉयबिलिटी 6 प्रतिशत बढ़ी है और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए) में यह 3 फीसदी घट गई है। वहीं बीएससी कोर्स करने वाली लड़कियों को सबसे अधिक नौकरियां मिली हैं।

देश में 62 फीसदी आबादी वर्किंग एज यानी 15 से 59 साल के बीच वाली है। देश की कुल आबादी में 54 फीसदी 25 वर्ष से कम उम्र के युवा हैं।

कैसे बनी रिपोर्ट

5.10 लाख युवाओं की फीडबैक

  • यह रिपोर्ट एचआर टेक्नोलॉजी सॉल्यूशन कंपनी पीपुल- स्ट्रॉन्ग, कौशल मूल्यांकन फर्म व्हीबॉक्स के साथ पीयरसन, सीआईआई, एआईसीटीई, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और एआईयू द्वारा मिलकर किए गए सर्वे के आधार पर तैयार की गई है।
  • रिपोर्ट में 120 से ज्यादा बड़ी कंपनियों और लगभग 5 लाख 10 हजार नौकरी योग्य लोगों के फीडबैक को आधार बनाया गया है। 5200 संस्थानों में विजिट किया गया। नौकरी कर रहे पुरुषों और महिलाओं से अलग-अलग बात कर उसी आधार पर सभी शहरों और राज्यों के स्थान तय किए हैं।
  • राज्यों का स्कोर डोमेन एक्सपर्टाइज, पॉजिटिव एटीट्यूड, एडेप्टिबिलिटी, इंग्लिश लैंग्वेज, न्यूमेरिकल एंड लॉजिकल एबिलिटी (आईक्यू), लर्निंग एबिलिटी, इंटर पर्सनल स्किल, एबिलिटी टू वर्क वैल विद अदर जैसे आठ पॉइंटों के आधार पर तय किया गया है।
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