पराली नहीं जलाने पर किसानों को इंसेंटिव देगी सरकार

प्रदूषण की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार खेतों में पराली नहीं जलाने वाले किसानों को इंसेंटिव देने की तैयारी कर रही है। जिस पंचायत में पराली नहीं जलेगी, उसे भी एक लाख रु. इनाम दिया जाएगा। इसके लिए क्लीन एयर इम्पैक्ट फंड बनाया जा रहा है। मुख्य रूप से हरियाणा, पंजाब, यूपी और राजस्थान इस योजना में शामिल होंगे। पराली जलाने पर रोक के लिए बजट में आवंटित 1200 करोड़ रु. इसी फंड में इस्तेमाल किए जाएंगे। इंसेंटिव की रकम अभी सरकार के स्तर पर तय की जानी बाकी है।

3 तकनीकों से पराली निपटाएगी सरकार

1. मलचिंग: धान की कटाई के बाद बचे हिस्से को मशीन की मदद से बाहर निकाल कर खेतों में छोड़ दिया जाता है। वह अपने-आप गलकर मिट्‌टी में मिल जाते हैं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है और खाद की जरूरत कम पड़ती है।

2. पराली से बने पेलेट (ब्लॉक): कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट में पराली से बने पेलेट इस्तेमाल किए जाएंगे। एनटीपीसी ने तो पेलेट की खरीदारी के लिए टेंडर भी निकाल दिया है। पेलेट को कोयले के साथ मिलाकर प्लांट में इस्तेमाल किया जाता है।

3. पराली चार: मिट्टी और ईंट के बने छोटे से घर में पराली भरकर जलाई जाती है। ऑक्सीजन की कमी के चलते पराली धीरे-धीरे जलती है और कम प्रदूषण होता है। इस दौरान जमा कालिख को मिट्टी में मिलाने से उर्वरा शक्ति बढ़ती है।

इन राज्यों में सबसे ज्यादा जलाते हैं पराली

– रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब, उत्तरप्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के दो दर्जन से अधिक जिलों में पराली जलाई जाती है। पंजाब के पांच जिलों मोगा, पटियाला, लुधियाना, संगरूर व बरनाला में सबसे अधिक पराली जलती है।

– धान की खेती के बाद किसानों को रबी फसल की बुवाई करनी होती है। इसके लिए उन्हें 15-20 दिन मिलते हैं। ऐसे में किसान खेतों में पराली जला देते हैं, ताकि जल्दी अगली बुवाई कर सकें।

  • यह योजना जून-जुलाई में खरीफ के सीजन की शुरुआत तक अमल में आ सकती है। 
  •  सूत्रों के अनुसार इसमें अकेले पंचायतों के लिए करीब 700 करोड़ रुपए रखे जाने का अमान है। मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, यूपी और राजस्थान इस योजना में शामिल होंगे। 
  •  यह योजना कृषि मंत्रालय, नीति आयोग, पर्यावरण मंत्रालय, बिजली मंत्रालय, आईआईटी कानपुर एवं औद्योगिक संगठन सीआईआई ने मिलकर तैयार की है। 
  •  इसकी नोडल एजेंसी पर्यावरण मंत्रालय होगा। योजना का मकसद पूरे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण को नियंत्रित रखना है। पिछले साल नवंबर-दिसंबर में उत्तर भारत में भारी वायु प्रदूषण हुआ था।
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