देश के लिए सरकार का बड़ा फैसला: जानने के लिए पूरा पढ़े ।

नल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम (एनएचपीएस) के तहत सरकार लोगों को आधार या पहचान पत्र के बिना ही योजना का लाभ देगी। मोदीकेयर का लाभ पाने के लिए लाभार्थी के पास केवल राशन कार्ड होना ही पर्याप्त माना जाएगा। इसके अलावा वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, राशन कार्ड या फिर दूसरे सरकार द्वारा निर्धारित पहचान पत्र के जरिए भी परिवार को लाभर्थियों की सूची में डालने की अनुमति होगी। मोदी सरकार के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट आयुष्मान भारत के तहत गरीब लोगों को स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा।

 अधिकारी ने कहा कि आधार को अनिवार्य ना बनाने का निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि इसके साथ संवेदनशीलता जुड़ी हुई है। सुप्रीम कोर्ट में 12 अंकों के यूनिक बायोमैट्रिक नंबर को चुनौती देने के लिए कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। जिसमें कहा गया है कि यह गोपनीयता पर हमला करता है और लाभ से लोगों को वंचित करता है जैसे कि सब्सिडी राशन। सरकार का कहना है कि आधार चोरी की जांच, यह सुनिश्चित करना कि जरूरतमंद तक लाभ पहुंचे और भ्रष्टाचार से मुक्त रखने के लिए जरूरी है।

सरकार ने पहले ही एनएचपीएस के लिए डाटा इकट्ठा करना शुरू कर दिया है। जिसके तहत उस गरीब परिवार को 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा जिसकी पहचान सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) के आंकड़ों के आधार पर होगी। करीब 101 मिलियन परिवारों और 500 मिलियन लोगों को आयुष्मान भारत का लाभ मिलेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर 19 अप्रैल तक हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एसईसीसी सत्यापन के काम को पूरा किया जाना है। ग्राम सभाएं गांव के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के जरिए हर दरवाजे पर जाकर डाटा इकट्ठा करेंगे।

साल 2011 में पहली बार एसईसीसी को आयोजित किया गया था। इसके जरिए जनसंख्या के आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्ग की पहचान करना था। एनएचपीएस की सत्यापन प्रक्रिया में मोबाइल नंबर, लाभार्थियों का विवरण और लोगों के रिकॉर्ड्स को अपडेट करना शामिल है। इसमें उन लोगों का पूरा ब्यौरा होगा जिनकी मृत्यु हो चुकी है या फिर शिफ्ट हो चुके हैं।

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