देश के लिए कुर्बान हुए शहीद की अंतिम विदाई आज

भिवानी : छत्तीसगढ़ में कांकेर के जंगल में बुधवार देर रात नक्सलियों ने आईईडी बम विस्फोट कर गश्त कर रही बीएसएफ टीम पर फायरिंग कर दी। इसमें भिवानी के खरक कलां निवासी असिस्टेंट कमांडेंट गजेंद्र सिंह और बिहार के कांस्टेबल अमर सिंह शहीद हो गए। बस्तर रेंज के आईजी विवेकानंद सिन्हा ने बताया कि बीएसएफ की 134वीं बटालियन रावघाट क्षेत्र के जंगल में 10 किमी भीतर थी। तभी नक्सलियों ने हमला कर दिया।

​छत्तीसगढ़ में शहीद हुआ हरियाणा का BSF जवान, आज होगी अंतिम विदाई

गजेंद्र सिंह की आज गांव में अंतिम विदाई

शहादत की खबर मिलते ही गांव सन्न रह गया। आसपास के लोग जुट गए। पंच मोनू शर्मा ने बताया कि गजेंद्र की पांच माह की दो जुड़वां बेटियां हैं। शुक्रवार को शहीद का सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव में 13 दिन तक शोक रखा जाएगा।

1998 में हुए थे सेना में भर्ती

गजेंद्र सिंह 1998 में बीएसएफ में सब इंस्पेक्टर भर्ती हुए थे। उनकी उम्र 42 साल थी।  गजेंद्र के चचेरे भाई सुरेंद्र ने बताया कि शहीद अपने पीछे पत्नी मोनिका सहित अपनी बुजुर्ग मां व दो सात महीने की बेटियां छोड़ गए हैं। शहीद गजेंद्र सिंह के घर सात माह पूर्व ही दो जुड़वां बेटियों ने जन्म लिया था।

सीआरपीएफ में सूबेदार थे गजेंद्र के पिता

– शहीद के पिता दिवंगत मोती भी सीआरपीएफ से सेवानिवृत्त हुए थे। गजेंद्र ने अपने पिता से प्रेरणा लेते हुए भारतीय फौजी में भर्ती होकर देश की सेवा करने का जुनून बचपन से ही था।

– उनको बचपन से ही तिरंगा झंडा अच्छा लगता था, सेना में भर्ती होने के बाद हमेशा अपने पास अपने देश का झंडा रखते थे। गजेंद्र वर्ष 1998 में छावला दिल्ली से बीएसएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती हुए थे।

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