दर्दनाक हादसा : श्मशानघाट भी पड़ा छोटा जब 22 मासूम बच्चों की उठीं अर्थियां ।

हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के नूरपुर में निजी स्कूल वजीर राम सिंह पठानिया बस हादसे के दूसरे दिन भी दिल दहला देने वाला मंजर रहा। मंगलवार सुबह परिजनों की चीखोपुकार के बीच ठेहड़ पंचायत से 22 मासूम बच्चों की अर्थियां उठीं। खुवाड़ा गांव से कुछ मिनटों के अंतराल में 12 बच्चों की अर्थियां घरों से निकलीं। श्मशानघाट चार किलोमीटर संकरे रास्ते में और छोटा था। ऐसे में दो किलोमीटर दूर खुले में ही एक दर्जन बच्चों के अंतिम संस्कार कर दिए।

यहां चार भाई-बहनों की चिताएं भी एक साथ जलीं। दो माह पहले सेहरा सजाने वाले शिक्षक राजेश की भी मंगलवार को चिता सजी देख हर आंख नम हो गई। लिफ्ट लेने वाली पूनम की हाथों में भी मेहंदी नहीं रच पाई। शादी से दो माह पहले ही नम आंखों से उसे मुखाग्नि देनी पड़ी। पांच साल से कम उम्र वाले तीन बच्चों समेत एक अन्य को दफनाया गया। नूरपुर में 21 और चुवाड़ी और दुनेरा में एक-एक चिता जली। हजारों लोगों ने नम आंखों से बच्चों को अंतिम विदाई दी। मां-बाप की चीखों से दिल दहल गए। ढांढस बंधाने वाले खुद भी विलख-विलख कर रो पड़े।

मंगलवार को ठेहड़ पंचायत के खुुवाड़ा गांव में 10 परिवारों के 12 बच्चों की एक साथ चिताएं जलीं। पंचायत के चक्की बोदू श्मशानघाट में 4 बच्चों और दो शिक्षकों, चक्की बहतपुर में 1 बच्चे और ड्राइवर मदन लाल, चक्की डाडर में 1, पंजाब के दुनेरा में 1 और लिफ्ट लेने वाली लड़की का चंबा के चुवाड़ी में अंतिम संस्कार किया गया। एक ही परिवार के तीन बच्चे ठेहड़ में, जबकि एक बच्चा सुलियाली में दफनाया गया। डाडर गांव के एक बच्चे का अंतिम संस्कार हुआ, जबकि दूसरी बच्ची पठानकोट अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है।

एक आंगन से चार, दूसरे से उठे तीन शव- खुवाड़ा के दो भाइयों राकेश और नरेश जम्वाल के घर के आंगन से चार बेटे-बेटियों के एक साथ शव उठे। ठेहड़ के मनोज-राकेश पठानिया के तीन बच्चों की शव यात्रा भी एक साथ निकली। यहां का मंजर देख हर आंख नम हो गई।

हिमाचल हाईकोर्ट ने नूरपुर निजी स्कूल बस हादसे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश सरकार और वजीर राम सिंह पठानिया मेमोरियल स्कूल को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं।

मामले पर सुनवाई 20 अप्रैल को होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने इस मामले में पूर्व महाधिवक्ता श्रवण डोगरा को एमिक्स क्यूरी नियुक्त किया। ऐसे दर्दनाक हादसे दोबारा न हों, इसको लेकर कोर्ट ने श्रवण डोगरा को सुझाव देने के लिए कहा है।

कोर्ट ने प्रदेश सरकार को आदेश दिए हैं कि वह घायलों को हरसंभव स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए। जिन बच्चों की हादसे में मौत हुई है, उन बच्चों के अभिभावकों की काउंसिलिंग कर उन्हें मानसिक वेदना से उबारने के प्रयास करने की सलाह भी दी।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पीड़ितों को सरकार की ओर से हरसंभव सहायता मुहैया करवाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने भी मंगलवार को पीड़ितों से मुलाकात की और घायलों का कुशलक्षेम पूछा है। कोर्ट को बताया गया कि सरकार ने मृतकों के परिवार को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की है और घायलों को जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

हादसे के बाद प्रदेश सरकार ने कांगड़ा समेत सभी मुख्यालयों में होने वाले जिला स्तरीय समारोहों को भी बेहद सादे तरीके से मनाने का निर्णय लिया है। कांगड़ा जिले में 20 अप्रैल तक किसी भी सरकारी कार्यक्रम या मेले-त्योहारों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं होगा।

विंद्रावन छिंज मेला कमेटी ने भी पालमपुर के दो दिवसीय मेले की सांस्कृतिक संध्याओं को निजी स्कूल बस हादसे के बच्चों को श्रद्धांजलि देने के लिए रद्द कर दिया है।

 

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