जीएसटी के प्रभाव

नई दिल्ली: जीएसटी पूरे देश में एक जुलाई से  लागू हो गया है. इसका प्रमुख लक्ष्य देश को एकल बाजार बनाना है, जहां वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो सके. लोगों को जीएसटी से क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा यह तब पता चला जब सोमवार को बाजार खुले.

सिगरेट, तंबाकू 

 वित्त मंत्रालय ने तंबाकू, पान मसाला और सिगरेट पर 1 जुलाई से अतिरिक्त उत्पाद शुल्क हटा दिया है. जीएसटी लागू होने के बाद यह कदम उठाया गया है. राजस्व विभाग ने 27 फरवरी 2010 की केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिसूचना निरस्त कर दिया. यह अधिसूचना तंबाकू पर उत्पाद शुल्क से संबद्ध था.

जीएसटी संविधान (संशोधन) कानून केंद्र को तंबाकू तथा तंबाकू उत्पाद समेत कच्चा तेल, डीजल, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस तथा एटीएफ पर उत्पाद शुल्क लगाने की अनुमति देता है.

चेक पोस्ट

राज्य सीमा चौकियां सामान तथा गंतव्य के हिसाब से कर अनुपालन की जांच करती हैं. इससे वस्तुओं की आपूर्ति में तो विलंब होता ही है, साथ ही ट्रकों की कतारें लगने से पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है.

दिल्ली, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित 22 राज्यों ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था लागू होने के तीन दिन के भीतर जांच चौकियां (चेक पोस्ट) हटा दी हैं.  मंत्रालय ने कहा कि असम, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों सहित आठ अन्य राज्य भी चेक पोस्ट हटाने की प्रक्रिया में हैं.

मोबाइल रिचार्ज और इंटरनेट पैक

जीएसटी से टीवी, मोबाइल के रिचार्ज और पोस्ट पेड मोबाइल के बिल जरूर महंगे हो गए हैं लेकिन इंटरनेट पैक पर कोई असर नहीं पड़ा है. मोबाइल रिचार्ज पर जीएसटी से पहले 15 फीसदी टैक्स था जो अब जीएसटी के बाद 18  फीसदी हो गया है.

जीएसटी के बाद कई सामान दाल, तेल ,बिस्कुट और इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम सस्ते हो गए हैं. इसके साथ ही पहले जूते-चप्पलों पर 14.5 फीसदी टैक्स लगता था, लेकिन अब जीएसटी के बाद 500 से कम कीमत वाले जूते-चप्पलों पर पांच फीसदी और उससे ज्यादा पर 18 फीसदी टैक्स लग रहा है.

दवाई दुकानों पर GST के असर

दवाईयों की कीमत पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा है. दवाईयों पर जीएसटी से पहले पांच से 21 फीसदी तक टैक्स लगता था, जबकि जीएसटी के बाद ज्यादातर दवाईयां 12 फीसदी टैक्स के दायरे में आ गयी हैं. हालांकि कुछ ऐसी दवाईयां भी हैं जिन पर 28 फीसदी जीएसटी लगेगा.

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