जींद : 300 साल पहले 2 गांवों में क्यों बंद हुआ हुक्का-पानी जानिए इसके पीछे की वजह

जींद : चूहड़पुर और खरक भूरा गांव के सर्वजातीय लोगों की पंचायत के बीच शुक्रवार को अहम फैसला हुआ। दोनों गांव के बीच पिछले 300 साल से हुक्का-पानी की पाबंदी थी, जो खुल गई है। इसके बाद गांव के दादा खेड़े पर हवन कराया गया। इसमें चूहड़पुर, खरक भूरा व हिसार के बडाला में रह रहे चूहड़पुर के लोगों ने आहुति डाली। इस मामले को लेकर चूहड़पुर गांव की सामान्य चौपाल में शुक्रवार को तीन गांवों के मौजिज लोगों की पंचायत हुई। पंचायत में केहर सिंह ने कहा कि पिछले 300 साल की हुक्का पानी की पाबंदी को खत्म कर गांवों के लोगों के बीच हुए मतभेद को भूलकर एक नया रिश्ता बनाना है।

पंचायत में वेद प्रकाश बांगड़ ने कहा कि चूहड़पुर गांव के सभी वर्ग के लोग खरक भूरा गांव के इस फैसले का स्वागत करते हैं। गांव के लोग भविष्य में इस भूल को नहीं दोहराएंगे।

दोनों गांवों की पाबंदी खुलने के बाद चूहड़पुर गांव के लोगों ने एक सामूहिक भोज दिया। फैसले के बाद चूहड़पुर गांव के लोग खरक भूरा के लोगों के न्योते पर रविवार को गांव जाकर अन्न व जल ग्रहण करने जाएंगे।

इस वजह से हुआ था हुक्का-पानी बंद

  • चूहड़पुर के बुजुर्ग सुनहरा राम व राममेहर फौजी ने बताया कि लगभग 300 साल पहले गांव के बुजुर्ग भूरिया राम खरक भूरा गांव किसी कार्य से गया था। इस दौरान वहां के लोगों ने बुजुर्ग पर चोरी का आरोप लगाया था।
  • बुजुर्ग ने चोरी के आरोप को नकारते हुए गांव के लोगों की इसके लिए कोई भी शर्त पूरी करने की बात कही थी। इसको लेकर बुजुर्ग ने पीपल का पता हाथ पर रखकर उस पर आग में तपा कर लोहे का गोला रखकर चोरी न करने का विश्वास दिलाया था।
  • लोहे के गोले से भी बुजुर्ग का हाथ नहीं जला था। इससे वह निर्दोष साबित हुआ। उसी समय से चूहड़पुर गांव के लोगों ने खरक भूरा गांव के लोगों से संबंध तोड़कर आपस में हुक्का पानी बंद कर दिया था।

भाईचारा कायम रखने के लिए लगाया पीपल का पौधा

तीनों गांवों के मौजिज लोगों ने गांव के कुंडी तालाब पर एक पीपल का पौधा लगाया। ताकि पीपल के पत्ते से खरकभूरा के लोग माफी मांग सके।

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