जानिए एक्टिव ममता के मन में आखिर क्या है और वो क्यों राहुल गांधी से कन्नी काट रही हैं?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल पार्टी की अध्यक्ष ममता बनर्जी तीसरे मोर्चे की सोच को अमली जामा पहनाने में लगी हैं. दिल्ली में डेरा डालकर ममता हर उस पार्टी और नेता से मिलने में लगी हैं जो बीजेपी और मोदी के खिलाफ है. ताबड़तोड़ मुलाकात कर सियासी गोलबंदी में जुटी ममता मंगलवार को सोनिया गांधी से नहीं मिली. सोनिया गांधी की तबियत ठीक नहीं थी. हालांकि उन्होंने साफ किया कि वो बाद में मिलेंगी. लेकिन ममता ने अपनी किसी भी दौरे के दौरान राहुल गांधी से मिलने की बात नहीं की.

ममता ने एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की. हालांकि शरद पवार बीजेपी का खिलाफ कांग्रेस गठबंधन में शामिल होने की बात कर चुके हैं. ममता ने शरद पवार के अलावा सात पार्टियों के नेताओं से मुलाकात की.

कुछ से उनकी मुलाकात संसद में हुई और कुछ बाहर. लेकिन मुद्दा तय है. ममता गैर-बीजेपी, गैर-कांग्रेसी थर्ड फ्रंट खड़ा करना चाहती हैं. इसके लिए वो 12 दलों को साथ लाने की कोशिश में हैं जिसके पास 172 सांसद हैं. जब वो 12 दलों की बात करती हैं तो उसमें कांग्रेस की गिनती है लेकिन जहां तक राहुल गांधी के नेतृत्व की बात है उस पर वो पीछे हट जाती हैं. गुजरात चुनावों के फौरन बाद ममता ने साफ किया था कि वो गठबंधन में राहुल के नेतृत्ववाली कांग्रेस के अधीन नहीं रहना चाहती हैं. ओवर एक्टिव ममता के मन में आखिर क्या है और वो क्यों राहुल गांधी से कन्नी काट रही हैं?

राहुल गांधी से नाराज ममता

बताया जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी की बांग्लादेश यात्रा में ममता के शामिल होने पर राहुल गांधी ने तंज कसा था- ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री मोदी के बीच सांठ गांठ का आरोप लगाते हुए कहा था कि जब यूपीए की सरकार थी और तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बांग्लादेश जाना चाहते थे तब ममता बनर्जी ने हमसे कहा, ‘नहीं, एकला चलो रे’, लेकिन जब प्रधानमंत्री मोदी गए तो ममता वहां पर चल दीं. कहा जाता है कि ममता को इस बात से राहुल गांधी से काफी नाराजगी थी.

कांग्रेस और वाम दलों की नजदीकी

इसके अलावा कांग्रेस और वामदलों की बीच की नजदीकी भी ममता को काफी खटक रही हैं. कांग्रेस ने ममता बनर्जी के बजाय वाम दलों को ज्यादा तरजीह देते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वाम दलों के साथ गठबंधन किया था , जबकि ममता कांग्रेस के साथ गठबंधन करने को इच्छुक थीं. पश्चिम बंगाल में बड़ी जीत के बाद ममता बनर्जी ने कहा था कि किस तरह वह विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से गठबंधन के लिए दिल्ली में तीन दिनों तक थीं, लेकिन पार्टी के किसी नेता ने बात तक नहीं की.

विपक्ष का चेहरा बनना चाहती हैं ममता

वैसे कांग्रेस की तरफ से गैर बीजेपी दलों को एकजुट करने के प्रयास चल रहे हैं लेकिन कई दल राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकारने में हिचक रहे हैं. नीतीश कुमार के एनडीए में शामिल होने के बाद विपक्ष में एक ऐसे चेहरे की जरुरत है जिसे लेकर वो आगे बढ़ें. ममता उस चेहरे में अपना चेहरा देख रही हैं. यही वजह है कि ममता बनर्जी कांग्रेस को छोड़कर सभी विपक्षी दलों से रिश्ते सुधारने में जुटी हैं.

वैसे ममता बैनर्जी की पार्टी की स्थिति पश्चिम बंगाल में काफी मजबूत है. राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा में टीएमसी के 213 सदस्य हैं. ममता बनर्जी के पास लंबा राजनीतिक अनुभव है. वह केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाल चुकी हैं. उनके सोनिया गांधी, शरद पवार, अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं से अच्छे रिश्ते हैं.

गौरतलब है कि कांग्रेस के नेतृत्व में एक महागठबंधन और उससे अलग एक तीसरा मोर्चा बनाने, दोनों पर समानांतर रूप से बातचीत चल रही है. ऐसे में ममता बनर्जी अपने लिए सभी विकल्प खुले रखना चाहती हैं. हाल में वे सोनिया गांधी द्वारा आयोजित डिनर में शामिल तो नहीं हुईं, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को भेजा ताकि कांग्रेस से भी संवाद का रास्ता बना रहे.

ममता बनर्जी और उनका साथ दे रहे कई दलों को लगता है कि विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता उम्र और अनुभव में छोटे राहुल गांधी के नेतृत्व में काम करने में हिचकेंगे, लेकिन ममता बनर्जी के साथ उन्हें कोई समस्या नहीं होगी. कांग्रेस के पास महज 48 सांसद हैं, इसलिए वह भी बहुत मोलभाव करने की स्थ‍िति में नहीं है.

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