गुर्जर आरक्षण को लेकर क्या है कर्नल बैंसला का प्लान ?….क्या कर्नल का है ये डबल गेम ?

पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर भरतपुर जिले में 15 मई से शुरु होने वाला गुर्जरों के महापड़ाव और आंदोलन की अगले सात दिनों के लिए टल गया है। मंगलवार को बयाना तहसील के अड्डा गांव में महापंचायत के बीच तेज आंधी चलने लगी। इससे सभा में व्यवधान उत्पन्न हुआ और कुछ ही मिनटों बाद सभा में मौजूद गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की अगुवाई करने वाले मुखिया कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने महापड़ाव 23 मई तक टाल दिया।

जानकारी के अनुसार सोमवार देर रात को ही गुर्जर प्रतिनिधि मंडल बयाना लौट गया। इसके बाद मंगलवार दोपहर को महापंचायत में गुर्जर समाज के लोगों ने अड्डा गांव में जुटना शुरु किया। जिसमें संघर्ष समिति के मुखिया कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला, हिम्मत सिंह गुर्जर समेत अन्य पदाधिकारी सभा में मौजूद रहे।

यहां सरकार का प्रस्ताव पढ़कर सुनाया जा रहा था। तभी आंधी चलने लगी और माैसम बिगड़ गया। इसके बाद कर्नल बैंसला ने 23 मई को पीलूपुरा में गुर्जर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के बाद महापड़ाव करने का ऐलान किया।

पहले हाईकोर्ट ने रोक लगाई, फिर सुप्रीम कोर्ट ने दिए यह निर्देश

तब याचिकाकर्ता गंगासहाय ने इस विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बावजूद आरक्षण विधेयक पारित कराया गया। तब हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए ओबीसी आरक्षण विधेयक, 2017 के क्रियान्वयन पर नवंबर, 2017 में रोक लगा दी थी।

हाईकोर्ट ने ओबीसी कमीशन की रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के विपरीत जाकर एसबीसी को आरक्षण दिया है। ऐसे में 50 फीसदी सीमा का उल्लंघन नहीं हो सकता है और नाहीं राज्य सरकार 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण दे सकती है।

राजस्थान हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को आगे की कार्यवाही न करने का निर्देश दिया था।

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