कॉलेजों के पाठ्यक्रम को बदलने की कवायद में जुटी भाजपा सरकार

राज्य के विश्वविद्यालयों को दरकिनार कर पहली बार भाजपा सरकार कॉलेजों के पाठ्यक्रम को बदलने की कवायद में जुटी है। कॉलेजों से 57 शिक्षकों की सूची बनाकर बैठक भी बुलाने के आदेश दे दिए गए हैं। शनिवार को कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी और एमडीयू रोहतक में पहली बैठक होगी। मात्र डेढ़ दिन के अंदर इन कॉलेजों के शिक्षकों को 11 विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव की अपनी रिपोर्ट बनाकर रविवार को दोपहर एक बजे तक सबमिट करनी होगी।

इसमें पाठ्यक्रम बदलने के साथ ही च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम को भी यूजी स्तर पर शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जोकि अभी पीजी स्तर पर भी ठीक तरह से काम नहीं कर पाया है। विवि की स्वायतता के खतरे को देखते हुए अब शिक्षक फेडरेशन ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। हर विश्वविद्यालय में पाठ्यक्रम बदलने के लिए पीजी बोर्ड ऑफ स्टडीज और यूजी बोर्ड ऑफ स्टडीज होता है।

इससे पहले हर विषय की विभागीय समिति के एक्सपर्ट की ओर से मंथन किया जाता है। इसके बाद पाठ्यक्रम को बोर्ड आॅफ स्टडीज में रखा जाता है। इसे पास होने के बाद यह शैक्षणिक परिषद में जाता है। यहां एसी से अंतिम मोहर लगती है। पाठ्यक्रम बदलने का प्रयास कांग्रेस सरकार ने भी किया था।

इन विषयों का बदलेंगे सिलेबस

यह कमेटी सुबह 10 से रात 10 बजे तक काम करेगी। कमेटी इकोनॉमिक्स, पॉलीटिकल साइंस, मनोविज्ञान, गणित, फिजिक्स, कैमिस्ट्री, कम्प्यूटर साइंस, बॉटनी, जूलोजी, कॉमर्स और ज्योग्राफी विषय के सिलेबस में बदलाव करेगी। इस कमेटी में एमडीयू और कुरुक्षेत्र विवि से जुड़े कॉलेजों के शिक्षकों को ही लिया गया है।

सरकार की मंशा ठीक नहीं : डाॅ. विकास सिवाच

एचफक्टो के राज्य प्रधान डॉक्टर विकास सिवाच ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से डेढ़ दिन में पाठ्यक्रम तैयार करवाना अपने आप में ही बड़ा सवाल है। ऐसे कौन से एक्सपर्ट आ गए जो डेढ़ दिन में किसी भी विषय का पाठ्यक्रम तैयार कर देंगे। वहीं सरकार के पास कॉलेजों में सभी विषयों के शिक्षक भी नहीं हैं।

ऐसे में सीबीसीएस स्कीम कैसे चलेगी। अब अकेले काॅमर्स में ही 73 विषय हैं, कौन एक्सपर्ट डेढ़ दिन में पाठ्यक्रम बदल देगा? ये सवाल हैरान करते हैं कि सरकार बिना सोचे कदम उठा रही है। सरकार की मंशा ठीक नहीं है। अपनी मर्जी से शिक्षकों का चयन किया गया है। ये विवि की स्वायत्तता पर बड़ा हमला किया जा रहा है। ये फैसले वापस नहीं लिए गए तो सड़क पर भी उतरना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे।

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