किसान के बेटे दीपक लाठर ने किया जींद का नाम रोशन

जींद : गोल्ड कोस्ट में कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान भारतीय वेटलिफ्टर दीपक लाठर ने 69 किग्रा कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता। दीपक के मेडल जीतने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। घर में महिलाएं डांस करके जीत का जश्न मना रही हैं। परिवार वाले मिठाई बांट रहे हैं। दीपक के पिता का कहना है कि उसके बेटे ने कड़ी मेहनत से यहां तक जगह बनाई है।

– जींद जिले के शादीपुर गांव के किसान के बेटे दीपक लाठर को 8 साल पहले विदेशी कोच की दी गई सलाह ने वेटलिफ्टर बना दिया।

– दीपक के पिता बिजेंद्र लाठर का कहना है कि बचपन से ही दीपक वजन उठाने में मजबूत है। 12-13 साल की उम्र में ही वह अकेला खेत में बरसीम (चारे) की 50 किलो की गठड़ी उठा लेता था जबकि उन्हें उसे उठाने में दूसरे का सहारा लेना पड़ता था।

– बिजेंद्र ने बताया कि वर्ष 2009-10 में गांव में पांचवीं कक्षा पास करने के बाद उसका आर्मी स्पोर्टस इंस्टीट़्यूट पूना में सेलेक्शन हो गया। जब वह पूना पहुंचा और विदेश कोच जार्ज गुबला ने उनका मेडिकल फिटनेस टेस्ट लिया उन्होंने दीपक को वेटलिफ्टिंग गेम्स अपनाने की सलाह दी।

– कोच ने इस दौरान दीपक से कहा था कि यदि वह मेहनत के साथ प्रैक्टिस करेगा तो एक दिन बड़ा वेटलिफ्टर बनेगा।

वेटलिफ्टिंग में नेशनल रिकार्ड दीपक के नाम

– वर्ष 2015 में पूणे में हुई नेशनल यूथ कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 62 किलोग्राम भार वर्ग में वेटलिफ्टिंग के तीनों भार वर्ग में सबसे अधिक वजन उठाने का दीपक ने रिकार्ड बनाया है।
– इस दौरान उसने स्नैच में 120 किलोग्राम, क्लीन जर्क में 141 व कुल 261 किलोग्राम भार उठाकर सभी प्रतिद्वंदी वेटलिफ्टर को पछाड़ दिया था। इस पर दीपक को सीनियर, यूथ व जूनियर वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल हुए।
– इसी तरह से वर्ष 2017 में दक्षिण कोरिया में हुए एशिया कप में 69 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक, 2017 में ही आस्ट्रेलिया में हुई कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 69 किलोग्राम में यूथ व जूनियर में गोल्ड और सीनियर में कांस्य पदक जीता था।

बेस्ट चाइल्ड का मिला है अवार्ड

– दीपक लाठर को 15 वर्ष की आयु में उसके द्वारा हासिल की गई उपलब्धि पर वर्ष 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा बेस्ट चाइल्ड अवार्ड देकर सम्मानित किया गया था।

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